पिनगवां केस में ऐतिहासिक फैसला: दोषी को उम्रकैद, पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवजा।
बिलाल अहमद/ब्यूरो नूह मेवात।
नूंह जिले के पिनगवां थाना क्षेत्र में 3 वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और निर्मम हत्या के बहुचर्चित मामले में पोक्सो स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी हरीचंद्र वाल्मीकि को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (मृत्यु तक कारावास) की सजा सुनाई है, साथ ही ₹1,30,000 का जुर्माना भी लगाया है।
यह घटना 30 नवंबर 2024 की रात की है, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 1 दिसंबर 2024 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मामला पिनगवां थाना, जिला नूंह में एफआईआर नंबर 217/2024 के तहत दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक पोक्सो कोर्ट में हुई, जहां माननीय एएसजे डॉ. आशु संजीव तिंजन ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे जघन्य अपराध बताया और कठोर सजा सुनाई।
इस संवेदनशील केस में जमियत उलमा-ए-हिन्द ने पीड़ित परिवार को शुरू से कानूनी सहायता प्रदान की। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद महमूद मदनी के मार्गदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने पैरवी की। अधिवक्ता चौधरी ताहिर हुसैन रुपड़िया ने कोर्ट में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके चलते आरोपी की सभी जमानत याचिकाएं खारिज होती रहीं।
पुलिस और अभियोजन की तेजी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के 10–12 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी गई, जिससे मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरी हो सकी।
इसके अलावा, अदालत ने हरियाणा विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम 2020 के तहत पीड़ित माता-पिता को ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
जमियत उलमा-ए-हिन्द ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करेगा। संस्था ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता और सुरक्षा देने की मांग भी की है।


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