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अर्चना फाउंडेशन के फाउंडर तारेश जोरवाल ने ब्लड बैंक में पहुंचकर शुक्रवार को अपने जीवन का 22वां स्वेच्छिक रक्तदान किया।

अर्चना फाउंडेशन के फाउंडर तारेश जोरवाल ने  ब्लड बैंक में पहुंचकर शुक्रवार को अपने जीवन का 22वां स्वेच्छिक रक्तदान किया।


बिलाल अहमद/एडीटर इन चीफ

   जब मन में हो विश्वास, हम होंगे कामयाब। इसी संदेश को लेकर रक्तवीर तारेश जोरवाल ने  पुन: शुक्रवार  को रक्तदान कर एक अनजान मरीज के लिए प्लेटलेट्स दान करके मदद की  इस प्रेरणा पर उन्होंने कहा कि उनका यही विश्वास किसी ना किसी के काम आएगा ओर यही उनके लिए बड़ी खुशी का पल है , अर्चना फाउंडेशन के फाउंडर तारेश जोरवाल ने  ब्लड बैंक में पहुंचकर शुक्रवार को अपने जीवन का 22वां स्वेच्छिक रक्तदान किया पूर्ण किया उन्होंने बताया कि अबतक वे 13 बार रक्तदान और 9 बार प्लेटलेट्स दे चुके हैं।  मन दुखी हुआ तो जागा जुनून: रक्तवीर जोरवाल ने बताया कि यह रक्तदान की मुहिम तब चलाई जब वह इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ते थे। वर्ष 2016-17 में जब रक्त की कमी व समय पर रक्त नहीं मिलने की वजह से लोगो की जान जाने की खबर को समाचार पत्रों में पढ़ा तो उनके मन दुखी हुआ। इसी दुख ने दूसरों के जीवन को सार्थक बनाने के लिए रक्तदान का जुनून जागा ओर इस अभियान को शुरू कर दिया। इस अभियान को चलाने के लिए इंजीनियरिंग कर रहे  5 छात्रों ओर उनके कई मित्रों ने एक टीम बनाई और उसका नाम अलवर रक्तदाता जीवनदाता रखा। जहां एक अक्टूबर 2017 को अलवर शहर में पहला रक्तदान शिविर आयोजित किया। जहां पहले रक्तदान शिविर में 40 यूनिट रक्त एकत्र हुआ। उस समय रक्तवीर तारेश जोरवाल ने अपने मित्रों के साथ अपने जीवन का पहला रक्तदान ाी उसी दिन किया। वर्ष 2018 में इसी टीम का नाम बदलकर अर्चना फाउंडेशन किया। जहां इस अभियान में एक अक्टूबर 2017 से जनवरी 2022 तक अर्चना फाउंडेशन  के माध्यम से अलवर की अनेक संस्थओं, इंस्टीट्यूट, कॉलेजों के साथ कई शहरों में मिलकर 117 रक्तदान शिविरों का आयोजन करवाया जा चुका है।सूचना मिलते ही सेवा हो जाती है शुरू: उन्होंने बताया कि स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के साथ साथ ही लाइव डोनेशन, ऑन कॉल डोनेशन  के माध्यम से अभी तक हजारों लोगों को रक्त उपलब्ध करवा चुकी है। अर्चना फाउंडेशन में अधिकतर युवा वर्ग की टीम है। जिसमें लड़के एवं लड़कियां अपने जन्मदिन को विशेष रूप से दूसरों के  जीवन को खुशी देने के लिए रक्तदान शिविर लगाकर मनाते हैं। उन्होंने बताया कि अर्चना फाउंडेशन का व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया हुआ है। जिसमें किसी भी जरूरतमंद को रक्त की जब भी जरूरत होती है तो उस पर आने वाली सूचना पर  फाउण्डेशन की ओर से त्वरित रक्त उपलब्ध कराया जाता है। जिसमें जहां से भी सूचना हो वहीं उस जरूरतमंद को रक्तदाता द्वारा रक्त उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए संस्था द्वारा टीम के समन्वयक अपने स्तर पर वेरिफिकेशन करते हैं। यदि मरीज के परिजन में देने वाला है तो पहले उनको मोटिवेशनल करती है फिर उनका रक्तदान करवाती है, यदि किसी परिवार के पास रक्त देने के लिए कोई भी नहीं तो अर्चना फाउंडेशन अपने स्तर पर नजदीक वाली ब्लड बैंक से जरूरतमंद को बिना देरी किये हुए रक्त उपलब्ध करवाती है।फिजूलखर्ची ना हो: फाउंडेशन के युवा रक्तवीरों का कहना है कि उनके जन्मदिन के अवसर पर पार्टी आदि में फिजूलखर्चा न करके स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करवाते हैं। ऐसे मेें जरुरतमंदों को रक्त की जरूरत के समय इधर-उधर नहीं भटकना पड़े और समय पर रक्त मिल जाए। जिससे उनके मरीज की जान बच सके। यही नहीं अर्चना फाउंडेशन अलवर शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों एवं तहसील स्तर पर भी रक्तदान शिविर का आयोजन समय-समय पर करवाती रहती है।


अर्चना फाउंडेशन का इतिहास 


शरुआत :- आए दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित दुर्घटना मे उपचार के दोहरान रक्त की कमी की वजह से मौत की खबर को पढ़कर कॉलेज के छात्रों ने यह संस्था बनाई । और फिर 2016 से धीरे-धीरे रक्तदान के क्षेत्र में काम करने लगे । 2017 में पहला स्वैच्छिक रक्तदान शिविर 1 अक्टूबर 2017 को आयोजित किया गया, जिसमें 40 यूनिट रक्तदान हुआ । उस दिन राजस्थान के 33 जिलों में रक्तदान शिविर आयोजित किए गए ।




सफर:-  जैसे जैसे जरूरतमंद की मदद करते गये  वैसे वैसे यह सफर और बढ़ता गया । इस कार्य मे स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों का सहयोग भी निरंतर मिलना गया तो रक्तदान शिविर का आयोजन भी बढ़ता  गया । सभी युवा साथियों का कहना है कि हमें रक्तदान करके जो खुशी मिलती है और हम उसे अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकते ।


कुल रक्तदान शिविर :- यह फाउडेशन 1 अक्टूबर 2017 से आज तक कुल 117 रक्तदान शिविर  आयोजित करवा चुका हैं  और 4 नेत्र जांच शिविर भी


मिशन 1st :- मिशन 1st का उद्देश्य केवल रक्तदान के क्षेत्र में निरंतर काम करना, नए नए रक्तवीर तैयार करना,  लोगो को रक्तदान के प्रति जागरूक करना, जरूरतमंद लोगों को नि: शुल्क रक्त उपलब्ध करवाना और मदद करना रहा है। 


मिशन 2nd :-  मिशन 2nd की शुरुआत 16 सितंबर 2022 से की गई है । इस मिशन के पहले शिविर में 18 जरूरतमंद लोगों का मोतियाबिंद का नि:शुल्क ऑपरेशन करवाया गया। मिशन 2nd का उद्देश में जरूरतमंद बड़े - बूढो लोगों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन नि: शुल्क ऑपरेशन करवाना शामिल रहा जिससे की उनकी आखों को रोशनी मिल सके और फिर दुनियां को देख सके ।



मिशन 3rd :- मिशन 3rd की शुरुआत अर्चना फाऊंडेशन के 5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 1 Oct 2022 से शुरुआत की गई । जिसमे नि:शुल्क चिकित्सा जांच शिविर, और नि:शुल्क दवा वितरण की शुरुआत की गई है ।


उद्देश्य:- 

अर्चना फाउंडेशन अलवर शहर में लगातार स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन कर रही है साथ ही अधिकतर ग्राम स्वैच्छिक रक्तदान शिविर जन्मदिन पर या पुण्यतिथि पर या विशेष अवसर पर लगाए जाते हैं । अभी तक कुल 117 रक्तदान शिविर आयोजित करवा चुके हैं । अलवर जिले के अलावा अलवर जिले की विभिन्न तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर का आयोजन करवाते हैं  साथ ही समय-समय पर जरूरतमंद के लिए प्लेटलेट आदि  की व्यवस्था भी करवायी जाती है । अर्चना फाउंडेशन में अधिकतर युवा वर्ग के युवक व युवती है जो समय-समय पर रक्तदान करते हैं और अपने साथियों से भी रक्तदान करवाते हैं । साथ ही अलवर के अलावा विभिन्न जिलों में  भी रक्तदान शिविर आयोजित करवाती है ।अर्चना फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना साथ ही जरूरतमंद की मदद करना है ।


जागरूकता:- 

अर्चना फाउंडेशन का उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करना है । शिविर में नए-नए लोगों को जोड़ना जिससे कि  रक्तदाता भविष्य में स्वैच्छिक रक्तदान करें और रक्तदान को बढ़ावा मिले  सके ।

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